कृष्ण सुविचार जीवन को सही दिशा दिखाने वाले गहरे विचारों का अद्भुत स्रोत हैं। भगवान श्रीकृष्ण के उपदेश हमें सिखाते हैं कि जीवन में कर्म ही सबसे बड़ा धर्म है। गीता का प्रत्येक संदेश हमें सही निर्णय लेने, मन को संयमित रखने और परिस्थितियों के अनुसार धैर्य बनाए रखने की शक्ति देता है। कृष्ण कहते हैं कि जो बीत गया उसकी चिंता मत करो, जो आने वाला है उस पर ध्यान मत दो, केवल वर्तमान में कर्म करते रहो।
उनके सुविचार हमें मोह, क्रोध, लोभ और नकारात्मकता से दूर रहने की प्रेरणा देते हैं और ज्ञान, प्रेम, करुणा तथा नम्रता के मार्ग पर चलना सिखाते हैं। श्रीकृष्ण के विचार हमें यह समझाते हैं कि जीवन का हर क्षण एक नया अवसर है, और यदि हम अच्छे कर्म और सकारात्मक सोच अपनाएँ, तो सुख-शांति स्वयं हमारे जीवन में प्रवेश कर जाती है। वास्तव में, कृष्ण सुविचार केवल भक्ति नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला भी सिखाते हैं।
Krishna Suvichar in Hindi

कर्म करते रहो और फल की चिंता छोड़ दो,
यही जीवन का सबसे बड़ा योग है।
जो हुआ अच्छा हुआ, जो होगा अच्छा होगा,
बस वर्तमान को श्रेष्ठ बनाओ।
मनुष्य का अधिकार केवल कर्म पर है,
फल पर नहीं।

कर्म में उत्कृष्टता ही योग है,
परिणाम अपने आप श्रेष्ठ हो जाता है।
जिसने मन को जीत लिया,
उसने संसार को जीत लिया।
अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है,
इसे त्याग दो।

जो अपने कर्तव्य में आनंद पाता है,
वह जीवन भर प्रसन्न रहता है।
इच्छाएँ अंतहीन हैं,
संतोष ही सच्चा धन है।
क्रोध से बुद्धि नष्ट होती है,
और बुद्धि के बिना निर्णय भी नष्ट हो जाते हैं।
भय वहीं होता है,
जहाँ ईश्वर पर भरोसा कम होता है।
श्रीकृष्ण के प्रेरणादायक सुविचार

सफलता का मार्ग आत्मविश्वास से शुरू होता है,
और कर्म पर समाप्त।
जीवन में परिवर्तन ही सत्य है,
इसलिए बदलना सीखो।
ज्ञान से बढ़कर कोई धन नहीं,
और अज्ञान से बड़ा कोई शत्रु नहीं।

मनुष्य अपने विचारों से ही ऊँचा उठता है,
और उन्हीं से गिरता भी है।
जब मन शांत होता है,
तभी सत्य दिखाई देता है।
लोभ मनुष्य को गुलाम बना देता है,
संतोष उसे मुक्त करता है।

अपनी आत्मा का ज्ञान ही
मोक्ष का मार्ग खोलता है।
हर आत्मा ईश्वर का अंश है,
इसलिए किसी से द्वेष मत करो।
जो अपने अहंकार को जीत लेता है,
वह संसार का स्वामी बन जाता है।
त्याग में ही सच्चा सुख है,
संग्रह में नहीं।
जय श्री कृष्ण सुविचार

योग मन और बुद्धि के संतुलन का नाम है,
इसके बिना जीवन अधूरा है।
धैर्यवान व्यक्ति कभी असफल नहीं होता,
क्योंकि उसका समय जरूर आता है।
काम, क्रोध और लोभ,
ये तीन नरक के द्वार हैं।

जो स्वार्थ छोड़ देता है,
वह जगत का कल्याण करता है।
श्रद्धा वही है,
जो कठिन समय में भी अडिग रहे।
मन को नियंत्रित करो,
वरना मन ही तुम्हें नियंत्रित करेगा।

जो सत्य और धर्म के मार्ग पर चलता है,
वह कभी असहाय नहीं होता।
सुख-दुख आएँगे,
पर तुम स्थिर बने रहो।
हर घटना का एक उद्देश्य होता है,
उसे समझना ही ज्ञान है।
मोह बंधन है,
और ज्ञान मुक्ति है।
Krishna Suvichar

अपनी शक्ति को पहचानो,
क्योंकि ईश्वर ने तुम्हें व्यर्थ नहीं बनाया।
वाणी मधुर रखो,
यह सबसे सरल पूजा है।
जो प्राप्त है वही पर्याप्त है,
इसी में जीवन की शांति है।

क्रोध में लिया निर्णय,
हमेशा गलत होता है।
संसार बदलना आसान नहीं,
लेकिन अपना दृष्टिकोण बदलना आसान है।
कर्म बिना जीवन व्यर्थ है,
और ज्ञान बिना कर्म अज्ञान है।

हर किसी के भीतर ईश्वर है,
बस पहचानने की दृष्टि चाहिए।
प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता,
यह ईश्वर का नियम है।
जो अपने भय से लड़ता है,
समय उसके साथ खड़ा हो जाता है।
मृत्य अंत नहीं,
नई शुरुआत है।
राधे कृष्णा सुविचार

ईश्वर की कृपा बिना शब्दों के भी समझ आती है,
बस हृदय खुला होना चाहिए।
विपरीत परिस्थितियाँ
मनुष्य को मजबूत बनाती हैं।
धैर्य सबसे बड़ा हथियार है,
जिसे हर कोई चलाना नहीं जानता।

आत्मविश्वास वही है,
जो मनुष्य को अंधकार से प्रकाश में लाता है।
सत्य की राह कठिन है,
पर मंज़िल दिव्य है।
तुम बस अपना कर्तव्य निभाओ,
फल की चिंता ईश्वर पर छोड़ दो,
यही जीवन का महान सिद्धांत है।

जो व्यक्ति मन को नियंत्रित कर लेता है,
वह कठिनाइयों में भी शांत रहता है,
और यही सच्चा योगी है।
जब तुम्हें लगे कि सब कुछ खत्म हो गया,
एक कदम और बढ़ाना,
क्योंकि ईश्वर उसी क्षण रास्ता खोलते हैं।
क्रोध, लोभ और मोह मनुष्य की बुद्धि को नष्ट कर देते हैं,
और नष्ट बुद्धि वाला
सही मार्ग पहचान नहीं पाता।
जीवन में हर क्षण नया है,
उसे सकारात्मकता से अपनाओ,
यही आत्म-विकास का मार्ग है।
श्रीमद्भगवद्गीता श्री कृष्ण अनमोल वचन
ईश्वर दूर नहीं है,
वह हर जगह है,
बस तुम्हारे विश्वास की प्रतीक्षा में।
अज्ञान मनुष्य को बंधन में रखता है,
और ज्ञान उसे मुक्त कर देता है,
इसी में जीवन का सार छिपा है।
सुख-दुख आते जाते रहते हैं,
पर धैर्यवान व्यक्ति
हर परिस्थिति में सफल रहता है।
जो अपनी दृष्टि बदल लेता है,
वह दुनिया बदलता हुआ महसूस करता है,
क्योंकि परिवर्तन भीतर से शुरू होता है।
जब मनुष्य स्वार्थ छोड़ देता है,
तब उसके मार्ग में आने वाला हर रोड़ा हट जाता है,
क्योंकि तब ईश्वर स्वयं मार्गदर्शक बन जाते हैं।
आत्मा न जन्म लेती है न मरती है,
वह शाश्वत है,
यही गीता का अद्भुत सत्य है।
जो अपने कर्म को ईश्वर को अर्पित करता है,
उसका हर प्रयास सफल होता है,
क्योंकि उसमें दिव्यता जुड़ जाती है।
हर व्यक्ति में ईश्वर की ज्योति है,
उसे पहचानना ही सच्चा ज्ञान है,
और यही मोक्ष का मार्ग है।
अगर जीवन में भय है,
तो उसका कारण विश्वास की कमी है,
कृष्ण पर भरोसा रखो, भय समाप्त हो जाएगा।
मन वही देखता है जो वह सोचता है,
इसलिए सकारात्मक सोचो,
सकारात्मक जीवन अपने आप मिलेगा।
Lord Krishna Suvichar Hindi
विपरीत परिस्थितियाँ अंत नहीं,
वे हमारी परीक्षा हैं,
और परीक्षा के बाद ही सफलता मिलती है।
कर्म करते रहो,
क्योंकि ठहराव जीवन का पतन है,
और गतिशीलता प्रगति है।
जो व्यक्ति धैर्य रखता है,
वह चमत्कार होते हुए जरूर देखता है,
क्योंकि धैर्य ही विश्वास का स्वरूप है।
सच्ची भक्ति वह है,
जिसमें दिखावा नहीं,
सिर्फ हृदय की पवित्रता हो।
हर आत्मा ईश्वर से जुड़ी है,
इसलिए किसी को अपमानित मत करो,
दूसरों को सम्मान देना ईश्वर को सम्मान देने जैसा है।
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